प्रेम आ प्रकृति के अद्भुत गीतकार
प्रकृति से बिम्ब उठावे में अद्भुत रूप से सक्षम
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अगली पंक्ति में - बायीं ओर ब्रजभूषण मिश्र, बीच में अनिरुद्ध जी, दायीं ओर जितेंद्र कुमार |
91वर्षीय भोजपुरी के वरिष्ठतम गीतकार अनिरुद्ध जी के निधन मुजफ्फरपुर (बिहार) में ऊहाँ के आवास पर 7 मार्च, 2019 को हो गइल। ऊहाँ के निधन से भोजपुरी भासा के अपूरणीय क्षति होइल।ऊहाँ के गीतन के तीन गो किताब प्रकाशित बा----
(1)पनिहारिन, प्रथम प्रकाशन-1989,सरोज प्रकाशन,5,टैगोर हिल्स रोड, राँची
(2)कृष्ण बाल-लीला आ दोहावली, वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट साहित्य परिषद्, तेनुघाट-1
(3)गीतन के गाँव में, वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट साहित्य परिषद्, तेनुघाट-1
अनिरुद्ध जी के जनम सारण जिला के डीही ग्राम में9मार्च,1928के भइल रहे।ऊहाँ के पिता स्व जगदेव सहाय जी उर्दू-फारसी के विद्वान रहीं।ऊहाँ के शिक्षा राजपूत हाई स्कूल आ राजेन्द्र कॉलेज छपरा में भइल रहे ऊहाँ के आइए पास रहलीं।ऊहाँ के सन्1950से1986तक बेसिक स्कूल में अध्यापन कार्य कइले रहीं। सन्1986में ऊहाँ के प्रधानाध्यापक के पद से अवकाश ग्रहण कइलीं।पहिले अनिरुद्ध जी हिंदी में कविता लिखे के शुरू कइलीं। सन्1950से ऊहाँ जमके भोजपुरी भाषा में कविता आ गीत लिखे लगलीं।ऊहाँ के बिहार, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल, मध्य प्रदेश आदि राज्यन में कवि गोष्ठियन में सक्रिय रूप से भाग लेत रहलीं।
कलस किरन छलके
घाट-बाट पनिघट-पनिघट पर, कलस किरन छलके।
नयन खोलकर पान, चान सिर, ज्ञान सुधा टपके।।
किरन कलश उझिले सूरज, धो कलुष द्वेष भागे।
घर-घर भरे घाट-घाट घट, गाँव-गाँव जागे
जन-गन के जिनगी चहके, खिल फूल-फूल महके।।
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बसंत-1
भोर पियरी टहकार रँगे घाम,
लिखे रँग-रँग नव रेशम पतइन, मउसम के नाम।
बाग-बाग वन-वन बगियन, बसंत आ गइल।
तरु-तरु रँग-रँग नव रेशम पट पहिरा गइल।
किरन के सितार पर भैरवी बजा गइल।
गंधी तन-तन परान बन-बन महकावत बा।
बिहग-बृन्द बन्दीगण चहकत गुन गावत बा।
लग जाईं हिया बिरिछ बँहिया फइला गइल।
बसंत आ गइल।।
अनिरूद्ध जी प्रेम आ प्रकृति के अद्भुत गीतकार रहीं। प्रकृति से बिम्ब उठावे में ऊहाँ के अद्भुत रूप से सक्षम रहीं। अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के कार्यकारिणी के पिछला बइठक डॉ ब्रजभूषण मिश्र जी के आवास पर सम्पन्न भइल रहे। मीटिंग के बाद सभ कार्यकारिणी सदस्य अनिरुद्ध जी के आवास पर ऊहाँ से मिले गइल।आज ब्रजभूषण मिश्र जी के फोन आइल कि समाचार दुखद बा, अनिरुद्ध जी ना रहलीं।
हम फिर कहत बानी कि अनिरुद्ध जी के क्षमता के गीतकार विरले पैदा ले ला।भोजपुरी भाषा के समृद् करे में ऊहाँ के पूरा जिनिगी लगा देलीं।
हमार विनम्र श्रद्धांजलि बा।
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आलेख - जीतेंद्र कुमार
चित्र सौजन्य - जीतेंद्र कुमार
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