Saturday, 23 March 2019

भोजपुरी मिनी फ़िल्म फेस्टिवल, नई दिल्ली - 22 से 24 मार्च, 2019 तक भोजपुरी और मैथिली फिलीमन के देखाओल जाईं





दिनांक 24 तारीख 2019 के हैबिटैट फ़िल्म क्लब के आयोजन भोजपुरी मिनी फ़िल्म फेस्टिवल के आखिरी साँझ बा। 

• एह फ़िल्म फेस्टिवल के ओपनिंग फ़िल्म रहे दिनांक 22 मार्च के #फूलेना नाइट्स* निर्देशक अमित झा I
• दिनांक 23 मार्च के *भेंट* देखावल गईल जेकर निर्देशक रहनी आशीष पी मिश्र जी 
• आज तीसरका आ अंतिम दिन ह. एह दिन भोजपुरी के चार गो शार्ट फ़िल्म 
• ललका गुलाब (अमित मिश्र) 
• कोहबर (उज्ज्वल पांडेय) 
• ब्रीथ (राहुल के सिंह), 
• दान(राजू उपाध्याय)  आ 
• एक ठो मैथिली के शार्ट फ़िल्म कवि कल्पना (निर्देशक विकास झा) देखावल जाई। 
रउरा सबसे निहोरा बा जे आपन बेशकीमती समय में से थोड़ा समय निकाल के इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर सभागार में शाम 6:30 पर आयीं आ साफ सुथरा भोजपुरी खातिर प्रयासरत लोगन के हौसला के बल मिलो। फिल्मन के लेखक निर्देशक बतकहीँ खातिर उपस्थित रहीहें।

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आलेख- एम्. के. पाण्डेय 
प्रस्तुति - सुभाष कुमार 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com





Sunday, 10 March 2019

दिवंगत भोजपुरी गीतकार अनिरुद्ध जी के साहित्यिक परिचय / जीतेंद्र कुमार

प्रेम आ प्रकृति के अद्भुत गीतकार 
प्रकृति से बिम्ब उठावे में अद्भुत रूप से सक्षम

अगली पंक्ति में - बायीं ओर ब्रजभूषण मिश्र, बीच में अनिरुद्ध जी, दायीं ओर जितेंद्र कुमार

91वर्षीय भोजपुरी के वरिष्ठतम गीतकार अनिरुद्ध जी के निधन मुजफ्फरपुर (बिहार) में ऊहाँ के आवास पर 7 मार्च, 2019 को हो गइल। ऊहाँ के निधन से भोजपुरी भासा के अपूरणीय क्षति होइल।ऊहाँ के गीतन के तीन गो किताब प्रकाशित बा----
(1)पनिहारिन, प्रथम प्रकाशन-1989,सरोज प्रकाशन,5,टैगोर हिल्स रोड, राँची
(2)कृष्ण बाल-लीला आ दोहावली, वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट साहित्य परिषद्, तेनुघाट-1
(3)गीतन के गाँव में, वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट साहित्य परिषद्, तेनुघाट-1


अनिरुद्ध जी के जनम सारण जिला के डीही ग्राम में9मार्च,1928के भइल रहे।ऊहाँ के पिता स्व जगदेव सहाय जी उर्दू-फारसी के विद्वान रहीं।ऊहाँ के शिक्षा राजपूत हाई स्कूल आ राजेन्द्र कॉलेज छपरा में भइल रहे ऊहाँ के आइए पास रहलीं।ऊहाँ के सन्1950से1986तक बेसिक स्कूल में अध्यापन कार्य कइले रहीं। सन्1986में ऊहाँ के प्रधानाध्यापक के पद से अवकाश ग्रहण कइलीं।पहिले अनिरुद्ध जी हिंदी में कविता लिखे के शुरू कइलीं। सन्1950से ऊहाँ जमके भोजपुरी भाषा में कविता आ गीत लिखे लगलीं।ऊहाँ के बिहार, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल, मध्य प्रदेश आदि राज्यन में कवि गोष्ठियन में सक्रिय रूप से भाग लेत रहलीं।
कलस किरन छलके
घाट-बाट पनिघट-पनिघट पर, कलस किरन छलके।
नयन खोलकर पान, चान सिर, ज्ञान सुधा टपके।।


किरन कलश उझिले सूरज, धो कलुष द्वेष भागे।
घर-घर भरे घाट-घाट घट, गाँव-गाँव जागे
जन-गन के जिनगी चहके, खिल फूल-फूल महके।।
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बसंत-1
भोर पियरी टहकार रँगे घाम,
लिखे रँग-रँग नव रेशम पतइन, मउसम के नाम।


बाग-बाग वन-वन बगियन, बसंत आ गइल।
तरु-तरु रँग-रँग नव रेशम पट पहिरा गइल।
किरन के सितार पर भैरवी बजा गइल।
गंधी तन-तन परान बन-बन महकावत बा।
बिहग-बृन्द बन्दीगण चहकत गुन गावत बा।
लग जाईं हिया बिरिछ बँहिया फइला गइल।
बसंत आ गइल।।

अनिरूद्ध जी प्रेम आ प्रकृति के अद्भुत गीतकार रहीं। प्रकृति से बिम्ब उठावे में ऊहाँ के अद्भुत रूप से सक्षम रहीं। अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के कार्यकारिणी के पिछला बइठक डॉ ब्रजभूषण मिश्र जी के आवास पर सम्पन्न भइल रहे। मीटिंग के बाद सभ कार्यकारिणी सदस्य अनिरुद्ध जी के आवास पर ऊहाँ से मिले गइल।आज ब्रजभूषण मिश्र जी के फोन आइल कि समाचार दुखद बा, अनिरुद्ध जी ना रहलीं।



हम फिर कहत बानी कि अनिरुद्ध जी के क्षमता के गीतकार विरले पैदा ले ला।भोजपुरी भाषा के समृद् करे में ऊहाँ के पूरा जिनिगी लगा देलीं।


हमार विनम्र श्रद्धांजलि बा।
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आलेख - जीतेंद्र कुमार
चित्र सौजन्य - जीतेंद्र कुमार
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल  आईडी - editorbejodindia@yahoo.com











Monday, 25 February 2019

भोजपुरी में कविता के किताब छप रहल बा. राउर कम से कम 5 कविता दीं


ईमेल से कम से कम 5 कविता राउर dhruva.n.gupta@gmail.com पर 15 मार्च 2019 तक अवश्य भेज दीं। विशेष जानकारी के लिंक बा - https://www.facebook.com/photo.php?fbid=2119475034795750&set=a.1306745366068725&type=3



Monday, 10 September 2018

भोजपुरी के भारतेंदु : भिखारी ठाकुर / लेखक - भगवती प्रसाद द्विवेदी

सामाजिक चेतना आ जन सरोकार के कालजयी रचनाकार

भिखारी ठाकुर रचित नाटक 'बिदेसिया' के एक दृष्य
 




ई निबंध के लेखक श्री  भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी आ हिंदी लेखन में 50 वर्ष से सक्रिय बा आउर उत्कृष्ट लेखन खातिर बीसियों पुरस्कार जितले बाड़न.
प्रतिक्रिया देबे खातिर ईमेल- editorbiharidhamaka@yahoo.com

लेखक- भगवती प्रसाद द्विवेदी

Monday, 23 April 2018

राउर जय हो जय हो -बाबू वीर कुंवर सिंह के समर्पित कविता / नीतू सुदीप्ति

राउर जय हो जय हो
अंगरेजन के धूर चटा देनीं
रणबांकुरा बाबू वीर कुंवर सिंह
राउर जय हो जय हो

जगदीशपुर के लाल
सभ केहू कर रहल
आजु रउआ के परनाम
राउर जय हो जय हो

गोली लगला के बाद
आपन बांह खुदे काट
गंगा मइया के चढ़ा दिहनीं
अमरतत्व पा गइनीं
राउर जय हो जय हो

1857 में अंगरेज रहसन
आजु 2018 में आतंकवादी बाड़े स
भारत के वीर जवान
सीमा पर ऊ सभनी से लोहा लेत बाड़े जा
रउआ सभे के प्रेरणा दे रहल बानीं
 राउर शौर्यगाथा सभका दिल में बसल बा
राउर जय हो जय हो। 

कवयित्री- नीतू सुदीप्ति








कवयित्री- नीतू सुदीप्ति

Wednesday, 13 December 2017

बिहारी धमाका के मेन पेज पर भोजपुरी पोस्टन के सूची

नीचे देल गेल बा मेन पेज पर भोजपुरी पोस्टबन के सूची -


परिचय दास के कविता सीरीज- 'सलीमा'
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/08/bhojpuri-poems-by-parichay-das-and.html

खूँटा में दाल- भगवती प्रसाद द्विवेदी
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/07/pulse-in-peg-bhojpuri-article-by.html

बलभद्र कल्याण के स्मृति सभा में भोजपुरी कविता
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/10/01102017.html

डॉ. रमेश पाठक के गीत अउर कविता
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/04/dr-ramesh-pathak-poet-in-bhojpuri-and.html

भगवती प्रसाद द्विवेदी के कविता
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/05/bhojpuri-kavitayen-bhagwati-prasad.html

भोजपुरी रचनाकारन के सूची
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/04/some-popular-writers-in-maithili.html

भोजपुरी रचनाकार के मोबाइल नम्बर
http://biharidhamaka.blogspot.in/2017/05/contact-numbers-provided-by-bihari.html




Tuesday, 28 November 2017

'पचमेल' के सलाम - ध्रुव गुप्त के आलेख एवं भोजपुरी गजल

भोजपुरी के दशा-दिशा पर बतकही भी भईल अउर छोटहन कविता गोष्ठी भी
ध्रुव गुप्त रचित भोजपुरी गजल नीचे पढ़ीं समूचा

भोजपुरी साहित्य, कला अउर संस्कृति के बचावे आ बढ़ावे खतिरा गठित 'पचमेल' के परसों छपरा में आयोजित पहिलका-पहिलका जुटान भोजपुरी साहित्य के पुरोधा स्वर्गीय पाण्डेय कपिल के नावे समर्पित रहे। सम्मलेन में स्व पाण्डेय कपिल के योगदान के ईयाद कईला के अलावा भोजपुरी के दशा-दिशा पर बतकही भी भईल अउर छोटहन कविता गोष्ठी भी। एह आयोजन में बिहार के कोना कोना से चहुंपल भोजपुरी के विद्वान, रचनाकार, संस्कृतिकर्मी - डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना, प्रो नीरज सिंह, डॉ जयकांत सिंह जय, ब्रजभूषणमिश्र, उदय नारायण सिंह, पृथ्वीराज सिंह, तंग इनायतपुरी, वैद्यनाथ प्रसाद विकल, अमरेन्द्र सिंह, संजय सिंह, दक्ष निरंजन शम्भू, कमलाकर मिश्र, कश्मीरा सिंह, तीस्ता उर्फ़ अनुभूति शांडिल्य, प्रीतम पाण्डेय सांकृत, कुमार चंदन, अशोक शेरपुरी, प्रेम किशोर, प्रिंस अभिषेक, दीपक गुप्ता, देवेन्द्र नाथ तिवारी के संगे भागीदारी के सम्मान हमरो मिलल। एहिमे कौनो संदेह नईखे कि 'पचमेल' के गठन आ जुटान से छपरा के ठहरल सांस्कृतिक जीवन में तनि परान के संचार भी भईल होई आ अपना माई भाषा भोजपुरी खतिरा परेम भी जागल होई। भाषण देबे त हमरा ना आवेला, बाकी लोग के कहला पर एगो भोजपुरी ग़ज़ल हमहू सुना देहनी।

भोजपुरी गजल

भईल बिहाने दरवज्जा पर कुकुर हांफे 
गईया मांगे सानी-पानी पोंछ उठा के

खेत-खेत में लाठी, घर-घर झगड़ा-टंटा
कहे दरोगा देख तमासा गांठ कटा के

घर में भूंजी भांग ना कईसे चली फुटानी 
भाग बटेसरा गोहाटी के टिकस कटा के

अचरा गिरा के घास गढ़े मत जो मुह्झौसी 
रस्ते में सहुआ बईठल बा आंख गड़ा के

सुनरी के अंगना में जबसे उचरल कागा 
झमके झोंटा में गमकौवा तेल लगा के

बाप कहे सतुआ पर चोखा-चटनी चाहीं 
बेटवा गरजे जांगर बा तs देख कमा के

दुई लबनी ताड़ी में बबुआ दुख बिसरा दे
चल झमकौले मेहरी के फटही पहिरा के

कहे मदारी, दउर बनरिया नाच के पहिले 
जा बाबू- भईया के आवs पेट देखा के !
(-ध्रुव गुप्त)
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आलेख एवं गजल - ध्रुव गुप्त
ईमेल - dhruva.n.gupta@gmail.com
छायाचित्र - पृथ्वी राज सिंह
लेखक का परिचय- श्री धुव गुप्त किसी परिचय के मुहताज नहीं है. वे अत्यंत लोकप्रिय लेखक, गज़लगो एवं कवि हैं. इनकी रचनाएं देश के सबसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रोज प्रकाशित होती रहती हैं. फेसबुक पर इनके 35000  से अधिक फौलोवर्स हैंं. ये भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत अधिकारी भी हैं.